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5 साल पहले से ही कैशलेस हो गई थी भारत की तिहाड़!
भारत में जहां कैशलेस लेनदेन की मुहिम जोरो-शोरों से चलाई जा रही है। वहीं ये जानकर आपकों हैरानी होगी कि भारत की तिहाड़ आज से 5 साल पहले ही कैशलेस हो गई थी। तिहाड़ हर तरह खरीदारी व लेनदेन कैशलेस है। जिसकी शुरुआत 5 साल पहले हुई थी। साल 2012 में तिहाड़ जेल प्रशासन ने कैदियों को एक स्मार्ट कार्ड जारी किया जो उनके खातों से जुड़े हुए हैं।
जेल अधिकारियों ने बताया कि एक कैदी को हर महीने अपने परिवार से अधिकतम 6 हजार रुपये ले सकता है। इस रूपये का प्रयोग कैदी अपनी रोजमर्रा से जुड़ी चीजों की खरीदारी में करते हैं। इसके लिए तिहाड़ में जगह-जगह दुकान व फूड स्टॉल हैं।
तिहाड़ में काम करने योग्य कैदियों से काम करवाया जाता है। जिसके बदले उन्हें जेल प्रशासन की ओर से भुगतान किया जाता है। भुगतान की यह राशि सीधे कैदियों के खाते में जाती है। जिसके बाद यह कैदियो के स्मार्ट कार्ड में जाती है।
स्मार्ट कार्ड को स्वाइप कर कैदी जेल परिसर में मनचाही चीजों की खरीदारी कर सकते हैं। कैशलेस लेनदेन के कई फायदे हैं। इसमें पाई-पाई का हिसाब रहता है। रिश्वत पर भी काफी हद तक अंकुश लग जाता है।
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