लखनऊ की धरोहर प्रो. नेत्रपाल जी का पार्थिव देह केजीएमयू को दिया गया
कविता, कहानी, निबन्ध संग्रह, उपन्यास लिखने वाले जाने माने साहित्यकार नेत्रपाल का शुक्रवार रात निधन हो गया, लंबे अरसे से बीमार नेत्रपाल 79 वर्ष के थे, अपने पीछे वो दो पुत्र और पुत्री छोड़ गये, प्रॉफेसर नेत्रपाल की खबर साहित्य जगत में तेजी से फैली और शोक का वातावरण बन गया , उनको श्रद्धांजलि देने वालो की भीड़ उमड़ पड़ी। उनका जन्म एटा में 1940 में हुआ था, जी वी पंत पॉलिटेक्निक में अंग्रेजी के प्रवक्ता रहे, 2000 में अपने पद से सेवानिवृत्त हुए। नेत्रपाल को श्रद्धांजलि देने में संयुक्त भाटिया महापौर लखनऊ प्रमुख रही। स्वर्गीय नेत्रपाल की इक्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार न करके उनका देहदान किया जाये ,शाम को परिवारीजनों ने उनकी इच्छा का सम्मान करते हुए राजाजीपुरम आवास पर पहुंची केजीएमयू की टीम को पार्थिव देह सौंपी। साहित्य से समाज का मार्गदर्शन करने वाले प्रो. नेत्रपाल की पार्थिव देह चिकित्सा छात्रों के अध्ययन के काम में आएगी।
प्रो. नेत्रपाल के छोटे पुत्र ब्रजेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि पिताजी दो साल पहले केजीएमयू एनॉटमी विभाग को अपनी देहदान कर चुके थे। वे अक्सर कहा करते थे, काम ऐसे करने चाहिए, जिससे दुनिया से जाने के बाद भी ये देह किसी न किसी के जरूर काम आए।

