पंजाब विधानसभा ने करतारपुर साहेब की जमीन का अदला बदला का प्रस्ताव पारित किया

medhaj news 17 Dec 18 , 06:01:38 India

ये कोई अनोखी बात नही है कि भारत करतारपुर साहेब की जमीन को ले ले और बदले में दूसरी जमीन देदे ये अदला बदली हो सकती है यदि पाकिस्तान तैयार हो, पाकिस्तान तभी तैयार होगा जब उसका स्वार्थ सिद्ध होगा , वो ऐसा रास्ता देखेगा की भारत में वो आतंक भड़ा सके। 2015 में भारत और बांग्लादेश के साथ हो चुका है , जिससे 53000 बांग्लादेशी और भारतीयों को फायदा हुआ था, 1963 में भी पाकिस्तान चीन ने किया था , पाकिस्तान ने उत्तरी कश्मीर की 750 वर्ग मील ज़मीन चीन को दे दी थी बदले में पाकिस्तान को लद्दाख का हिस्सा मिला, ये बात अलग है कि भारत ने इसको मान्य नही कहा |

पंजाब ने पाकिस्‍तान से श्री करतारपुर गुरु्द्वारे की जमीन की अदला-बदली का प्रस्‍ताव किया है। इस सबंध में पंजाब विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन शुक्रवार को प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। प्रस्‍ताव के अनुसार पाकिस्‍तान श्री करतारपुर गुरुद्वारे की जमीन भारत को दे दे और इसके बदल में उसे इतनी ही जमीन अन्‍य स्‍थान पर दे दी जाए। यह प्रस्‍ताव अब केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

विधानसभा में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कॉरिडोर को लेकर भारत सरकार व पाकिस्तान सरकार का धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया। इसमें श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व से पहले कॉरिडोर को शुरू करने के जरूरी काम पूरे करने की बात कही गई। इसमें संशोधन करवाते हुए शिअद विधायक व पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कहा कि जमीन की अदला-बदली का प्रस्ताव भी इसमें शामिल करना चाहिए।

इसके बाद मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इसे प्रस्‍ताव में शामिल कर लिया। प्रस्ताव बिना किसी विरोध के पास हो गया। प्रस्ताव के दौरान कैप्टन ने नवजोत सिंह सिद्धू का नाम नहीं लिया, जबकि आप ने कॉरिडोर का श्रेय सिद्धू को दिया। कैप्टन ने कहा कि कॉरिडोर भारत-पाकिस्तान बीच 'अमन का सेतु' बनेगा। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने कॉरिडोर मामले पर कहा, 'सिद्धू जी हम साथ चलेंगे। यह अच्छी शुरुआत है। इसे नकारात्मक रूप से नहीं देखना चाहिए। कॉरिडोर खुलता है तो वहां पर भी फुलप्रूफ इंतजाम होंगे।' वहीं, सिद्धू से कहा कि श्री गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व मानने के लिए अकाली दल की जहां भी जरूरत हो वह साथ चलेंगे।

फिरोजपुर के हुसैनीवाला स्थित शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव का समाधि स्थल पहले पाकिस्तान के कब्जे में था। 1950 में इसे वापस लेने पर सहमति वापस बनी। करीब दस साल बाद 17 जनवरी 1961 को फाजिल्का के 12 गांव व सुलेमान की हेड वर्क्‍स पाकिस्तान को देने के बाद यह स्थल भारत को मिला।1968 में इसे राष्ट्रीय समाधि स्मारक बनाया गया। गौरतलब है कि भगत सिंह राजगुरु व सुखदेव का अंतिम संस्कार सतलुज किनारे इसी भूमि पर हुआ था। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रताप सिंह बाजवा ने कुछ दिन पहले हुसैनीवाला की तर्ज पर करतारपुर की जमीन बदलने का मुद्दा उठाया था।

    मेधज न्यूज़ के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक करें। आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं।

    ...

    Similar Post You May Like


    Trends

    • 2018 में जियो यूजर्स को लगेगा झटका, मंहगे होंगे टैरिफ प्लान

    • कनाडा : पार्क में खुदाई के दौरान मिली 15 हजार साल पुरानी सुरंग

    • ऑनलाइन शॉपिंग कीजिए हर दिन, महीने के अंत में देने होगें पैसे...जानिए कौन सी कंपनी दे रही है ये सुविधा

    • पेट्रोल की जगह बीयर से चल सकेगी गाड़ियां...

    • दीपिका पादुकोण का सिर काटकर लाने वाले को 10 करोड़ का ऑफर, ट्विंकल खन्ना ने पूछा ‘GST लगेगा क्या?’

    Special Story

    • व्यंग्य -“ग्रामीण विद्युतीकरण की कहानी, टिंकू ट्रांसफार्मर की जुबानी”

    • जीवन के प्रति कुछ संवेदनाएँ

    • पुरुष का व्यक्तित्व

    • भारत का ऑस्ट्रेलिया दौरा:

    • "क्या हूँ मैं?"