इसरो का स्पेस अभियान तीन भारतीयों को अंतरिक्ष में ले जाना
इसरो चीफ ने बताया कि यह मिशन हमारे लिए काफी अहम है क्योंकि हम गगनयान में एक इंसान को स्पेस में भेजेंगे और यान के जरिए ही वापस धरती पर लाएंगे | इस प्रक्रिया के दो पहलू हैं मानव और इंजीनियरिंग | उन्होंने बताया कि इंसान को अंतरिक्ष में भेजने के लिए एक नया सेंटर भी स्थापित किया गया है | सिवान ने कहा कि यह साल गगनयान के लिए काफी अहम है क्योंकि दिसंबर 2020 में पहला मिशन और जुलाई 2021 में दूसरा मिशन तैयार होगा, इसे पूरा करने के बाद दिसंबर 2021 में गगनयान मिशन होगा | अगले साल के लिए कुल 32 मिशन प्लान किए गए हैं, जिसमें 14 लॉन्च व्हिकल से जुड़े हैं |
छह रिसर्च सेंटर स्थापित किए जाएंगे, ताकि भारतीय विद्यार्थियों को अभी नासा जाना पड़ता है, इस प्रोग्राम के बाद वे यहां वो सभी चीजें समझ पाएंगे। गगनयान के लिए शुरुआती ट्रेनिंग भारत में ही होगी लेकिन अडवांस ट्रेनिंग के अंतरिक्ष यात्रियों को रूस जाना पड़ सकता है। गगनयान में जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के चयन पर इसरो प्रमुख ने कहा कि सभी क्रू मेंबर्स भारत से होंगे, भारतीय एयरफोर्स के जवान होंगे, सिविलियन भी हो सकते हैं, जो भी चयन के पैमाने पर खरा उतरेंगे वही जाएंगे, महिलाओं को भी अवसर है। चयन संबंधित फैसले सिलेक्शन कमिटी करेगी। देशभर में छह इंक्यूबेशन सेंटर बनाए जाएंगे, जो सभी प्रॉजेक्ट्स के लिए ट्रेनिंग मुहैया कराएंगे। मोटे तौर पर इसरो का यह स्पेस अभियान तीन भारतीयों को 2022 में अंतरिक्ष में ले जाने का है। वैसे इसरो ने बीते कई दशकों में अपने रॉकेटों और उपग्रहों के अलावा मंगलयान और चंद्र मिशन से जो प्रतिष्ठा हासिल की है, उस सिलसिले में देखें तो गगनयान की जरूरत की आरंभिक वजह समझ में आ जाती है।


