जम्मू-कश्मीर पर सुप्रीम कोर्ट के सवालों के सरकार ने दिये ये जवाब
जम्मू-कश्मीर को लेकर दाखिल की गई याचिकाओं की सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया कि एक भी गोली नहीं चलाई गई है, कुछ स्थानीय बैन लगे हुए हैं। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से हालात सामान्य करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कश्मीर में अगर तथा-कथित बंद है तो उससे जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय निपट सकता है। इसमें एमडीएमके के अध्यक्ष वाइको ने नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला की रिहाई को लेकर याचिका दाखिल की थी। जिसपर अदालत ने केंद्र सरकार और जम्मू-कश्मीर को नोटिस जारी किया। इसके अलावा कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक ने घाटी में समाचार पत्र निकालने को लेकर हो रही परेशानी पर याचिका दायर की थी। वहीं एक याचिका में दावा किया गया था कि घाटी के लोगों को चिकित्सा सेवाएं नहीं मिल रही हैं। सभी याचिकाओं पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने केंद्र सरकार का पक्ष रखा।
उच्चतम न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुक अब्दुल्ला को न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने की मांग करने वाली याचिका पर केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से सोमवार को जवाब मांगा। अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा रद्द किए जाने के बाद से कथित रूप से हिरासत में हैं। वाइको ने कहा कि वह पिछले चार दशकों से अब्दुल्ला के निकट मित्र हैं। वाइको ने दावा किया कि नेशनल कांफ्रेंस के नेता को ‘बिना किसी कानूनी अधिकार के अवैध हिरासत’ में लेकर, उन्हें संविधान के तहत प्रदत्त अधिकारों से वंचित रखा गया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए चयनात्मक आधार पर प्रतिबंध हटाए जाएंगे।
उच्चतम न्यायालय ने माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी को अपने गृह राज्य जम्मू-कश्मीर वापस जाने की सोमवार को अनुमति दे दी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एसए बोबडे एवं एसए नजीर की पीठ ने कहा कि यदि एम्स के चिकित्सक उन्हें अनुमति दें तो पूर्व विधायक को घर जाने के लिए किसी की अनुमति आवश्यक नहीं है। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि उनका वाहन उनसे ले लिया गया है और वह अपने घर तक सीमित रहेंगे।
एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत को बताया कि मीडियाकर्मियों को उनके काम के लिए लैंडलाइन और कई अन्य संचार सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। कश्मीर स्थित सभी समाचार पत्र चल रहे हैं और सरकार हरसंभव मदद मुहैया करा रही है। प्रतिबंधित इलाकों में पहुंच के लिए मीडिया को ‘पास’ दिए गए हैं और पत्रकारों को फोन और इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया कराई गई है। दूरदर्शन जैसे टीवी चैनल और अन्य निजी चैनल, एफएम नेटवर्क काम कर रहे हैं। याचिका में कहा गया था कि कश्मीर से समाचार पत्र निकालने में मुश्किल हो रही है। जिसका सरकार की तरफ से एटॉर्नी जनरल ने जवाब दिया।
उच्चतम न्यायालय में कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन ने दायर याचिका में दावा किया कि लोगों को चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है। जिसके जवाब में एटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि पूरे जम्मू और कश्मीर के 5.5 से ज्यादा लोग इलाज के लिए ओपीडी जा चुके हैं। उन्होंने भसीन के दावे को सिरे से खारिज किया।





























