मोदी को गुजरात सीएम बनाने में था अरुण जेटली का हाथ
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे 66 वर्षीय अरुण जेटली का शनिवार को निधन हो गया। सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत के बाद उन्हें यहां भर्ती कराया गया था पिछले 3 दशक से अधिक समय तक अपनी तमाम तरह के काबिलियत के चलते जेटली लगभग हमेशा सत्ता के पसंदीदा लोगों में रहे सरकार चाहे जिसकी हो अति विशिष्ट विनम्र और राजनीतिक तौर पर उत्कृष्ट रणनीतिकार रहे जेटली प्रधानमंत्री मोदी के लिए मुख्य संकटमोचक थे। इनकी चार दशक की शानदार राजनीतिक पारी स्वास्थ्य के बिगड़ने से जल्द ही समाप्त हो गई।
सर्वसम्मति बनाने में अरुण जेटली को महारत प्राप्त थी। इनको लोग मोदी का चाणक्य भी मानते थे, जोकि 2002 में मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही सबके सामने आ गया जेटली ने मोदी के साथ-साथ अमित शाह के भी मदद की जब उन्हें गुजरात से बाहर कर दिया गया था। शाह को उस वक्त जेटली के कैलाश कॉलोनी के दफ्तर में देखा जा सकता था। मोदी को 2014 में भाजपा के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाए जाने की घोषणा के कुछ महीने पहले ही जेटली ने राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान और नितिन गडकरी को साथ लेने के लिए पर्दे के पीछे रहकर काम किया। मोदी ने भी जेटली को कभी पीछे नहीं रखा। जब मोदी पहली बार प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने सब को दरकिनार करते हुए अरुण जेटली को वित्त वित्त मंत्री का महत्वपूर्ण पद सौंपा। मोदी, अरुण जेटली को अनमोल हीरा भी बता चुके हैं और उनकी हानि को देश की सबसे बड़ी हानि मानते हैं। वैसे तो जेटली सांसद का कोई भी चुनाव नहीं जीते हैं लेकिन फिर भी मोदी ने उनकी काबिलियत को देखते हुए अपनी सरकार में महत्वपूर्ण पद दिया। मोदी और जेटली जी का साथ बहुत पुराना है जब मोदी को दिल्ली में 1990 के दशक में भाजपा का महासचिव नियुक्त किया गया था तब वाह जेटली के ही बंगले में ठहरे थे,उस वक्त जेटली अटल बिहारी सरकार में मंत्री थे। उन्हें उस कदम का भी हिस्सा माना जाता है जो गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री केशुभाई पटेल को हटाकर मोदी को इस पद पर बिठाने को लेकर उठाया गया।























