कमल हसन बोले कोई शाह य सुल्तान नहीं तोड़ सकता भारत की अनेकता में एकता
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने 'हिंदी दिवस' पर भारत की राष्ट्रभाषा पर एक बयान दिया था। जिसके बाद हिंदी को लेकर विवाद शुरू हो गया। साउथ के सुपरस्टार और राजनेता कमल हासन (Kamal Haasan) ने एक वीडियो के जरिए अमित शाह पर निशाना साधा है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा है कि अगर इसे बढ़ावा दिया गया तो जल्लीकट्टू विरोध प्रदर्शन से भी बड़ा आंदोलन होगा।अभिनेता से नेता बने कमल हासन ने सोमवार को केंद्र सरकार को 'एक देश, एक भाषा' को बढ़ावा देने के खिलाफ चेतावनी दी है। एक विडियो जारी कर कमल ने अप्रत्यक्ष रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर हमला करते हुए कहा है कि भारत 1950 में 'अनेकता में एकता' के वादे के साथ गणतंत्र बना था और अब कोई 'शाह, सुल्तान या सम्राट' इससे इनकार नहीं कर सकता है। बता दें कि अमित शाह ने हिंदी दिवस पर 'एक राष्ट्र, एक भाषा' की पैरवी की थी।
Now you are constrained to prove to us that India will continue to be a free country.
You must consult the people before you make a new law or a new scheme. pic.twitter.com/u0De38bzk0
विडियो में कमल ने कहा है कि वह सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं लेकिन उनकी मातृभाषा हमेशा तमिल रहेगी। मक्कल निधि मैय्यम अध्यक्ष ने सोमवार को अपने ट्विटर हैंडल से एक विडियो जारी किया। इसमें उन्होंने आक्रामक अंदाज में कहा कि इस बार एक बार फिर भाषा के लिए आंदोलन होगा और यह जल्लीकट्टू आंदोलन से भी बड़ा होगा। उन्होंने आगे कहा कि भारत या तमिल नाडु को ऐसी जंग की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, 'जल्लीकट्टू तो सिर्फ विरोध प्रदर्शन था। हमारी भाषा के लिए जंग उससे कई गुना ज्यादा होगी। राष्ट्रगान भी बांग्ला में होता है, उनकी मातृभाषा में नहीं। वह जिस बात का प्रतीक है, उसकी वजह से हम उसे गाते हैं और इसलिए क्योंकि जिस शख्स ने उसे लिखा वह हर भाषा को अहमियत और सम्मान देते थे।' कमल ने कहा कि भारत एक संघ है जहां सभी सौहार्द के साथ मिलकर बैठते हैं और खाते हैं। हमें बलपूर्वक खिलाया नहीं जा सकता।
गृह मंत्री अमित शाह ने ‘हिंदी दिवस’ पर अपने भाषणों और ट्वीट के जरिए हिंदी को बढ़ावा दिए जाने को लेकर कहा था, ‘भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है, लेकिन पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो विश्व में भारत की पहचान बने। आज देश को एकता की डोर में बांधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है, तो वो सर्वाधिक बोले जाने वाली हिंदी भाषा ही है।’











