जानें, कन्या पूजन का महत्व और कारण...
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी 17 अक्टूबर और नवमीं 18 अक्टूबर को मनाई जा रही है | 10 अक्टूबर से हुए शुरू नवरात्रि के आखिरी दो दिनों में कन्या पूजन की परपंरा होती है | कन्या पूजन के लिए सभी घरों में काफी दिनों पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं | अष्टमी और नवमीं वाले दिन कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का भोग लगाने के साथ-साथ उन्हें तोहफे और लाल चुनरी उड़ाना भी शुभ माना जाता है | लेकिन यह काम शुभ मुहूर्त पर हो तब | नवरात्र में विशेष तौर पर मां के विभिन्न स्वरूपों की पूजा का विधान है | लेकिन अष्टमी और नवमी के दिन कन्याओं की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है | इस दिन दो साल से लेकर 10 साल की बच्चियों की पूजा की जाती है | अलग-अलग उम्र की कन्याएं देवी के अलग-अलग रूप को दर्शाती हैं | नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिबिंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्तों का नवरात्र व्रत पूरा होता है |
जानें, अष्टमी के दिन कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?
पहला मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 28 मिनट से 9 बजकर 20 मिनट तक |
दूसरा मुहूर्त- सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 12 मिनट तक |
जानें, नवमी के दिन कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?
पहला मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 29 मिनट से 7 बजकर 54 मिनट तक |
दूसरा मुहूर्त-सुबह 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 3 बजकर 3 मिनट तक |
कन्याओं की आयु दो वर्ष से ऊपर तथा 10 वर्ष तक होनी चाहिए और इनकी संख्या कम से कम 9 तो होनी ही चाहिए और एक बालक भी होना चाहिए, जिसे हनुमानजी का रूप माना जाता है | जिस प्रकार मां की पूजा भैरव के बिना पूर्ण नहीं होती है, उसी तरह कन्या-पूजन के समय एक बालक को भी भोजन कराना बहुत जरूरी होता है | यदि 9 से ज्यादा कन्या भोज पर आ रही है तो कोई आपत्ति नहीं है |
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