आज है कार्तिक पूर्णिमा, उठाए इस शुभ अवसर का लाभ
कार्तिक पूर्णिमा को कई जगह देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ने तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के त्रिपुरों का नाश किया था। त्रिपुरों का नाश करने के कारण ही भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी भी प्रसिद्ध है। इस दिन गंगा-स्नान व दीपदान का विशेष महत्व है। इसी पूर्णिमा के भगवान विष्णु का मत्स्यावतार हुआ था। कई तीर्थ स्थानों में इसे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इस साल कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर बहुत ही शुभ संयोग बना है। पूर्णिमा तिथि की देवी मां लक्ष्मी हैं और शुक्रवार भी है जिसकी देवी भी माता लक्ष्मी ही हैं। चंद्रमा भी इस अवसर पर संयोगवश शुक्र की राशि वृष में स्थित है जो सुख समृद्धि कारण है। ऐसे में कार्तिक पूर्णिमा के दिन कुछ छोटे-छोटे उपाय करके सुख समृद्धि पा सकते हैं।
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प्रात: काल उठकर घर और शरीर की सफाई के साथ ही सात्विक मन से भगवान का नाम लेते हुए मुख्य द्वार की सफाई करनी चाहिए। इसके बाद मुख्य द्वार पर रंगोली बनाएं और हल्दी से स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। आम के पत्तों का तोरण लगाएं।
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कार्तिक पूर्णिमा पर बहते जल में दीपदान करना चाहिए। यदि ऐस करना संभव न तो शिवजी के मंदिर में जाकर शिवलिंग पर गंगाजल, शहद, कच्चा दूध मिलाकर चढ़ाएं और मंदिर में देसी घी के दीये जलाएं। साथ ही पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाना न भूलें।
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यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा का प्रतिकूल स्थिति में है तो आप कार्तिक पूर्णिमा के दिन किसी जरूरतमंद व्यक्ति को चावल दान करें।
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कार्तिक पूर्णिमा पर चांद को गंगाजल अर्पित कर खीर, मिश्री और मखाने का भोग लगाना चाहिए।
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तुलसी को माता लक्ष्मी का रूप माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर सुबह और शाम दोनों समय तुलसी के पास देसी घी का दीपक जलाना चाहिए। साथ ही हाथ में घी का दीपक लेकर तुलसी की 7 बार परिक्रमा करनी चाहिए।
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