विक्रम लैंडर की तस्वीरें नहीं ले पाया नासा, बताई ये वजह
भारत का चंद्रयान-2 (chandrayaan 2) मिशन लगभग खत्म हो गया है | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने लैंडर विक्रम (lander vikram) को जिंदा करने की उम्मीदें अब छोड़ दी हैं | इस मिशन में भारत के लिए आखिरी उम्मीद दुनिया का सबसे बड़ा स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन नासा (NASA) था | लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि वहां से भी अच्छी खबर नहीं मिली है | नासा का सेटेलाइट लैंडर विक्रम की तस्वीरें लेने में नाकाम रहा है | 6 सितंबर को चंद्रयान-2 का लैंडर विक्रम की चांद की सतह पर हार्ड लैंडिंग हुई थी | इसकी वजह से लैंडर के 4 में से एक थ्रस्टर तिरछा हो गया है और ग्राउंड स्टेशन से डिस्कनेक्ट हो गया | चांद पर लूनर डे खत्म होने के बाद अंधेरा हो गया है | लिहाजा अब 'घायल' विक्रम की तस्वीरें भी नहीं मिल पा रही हैं | दो दिन पहले खबर आई थी कि नासा का सेटेलाइट LRO इन दिनों चांद का चक्कर काट रहा है और वो बुधवार की रात चांद के उस इलाके के पास पहुंचने वाला है, जहां शायद लैंडर विक्रम पड़ा हो |
लेकिन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी का कहना है कि वो उसके ऑर्बिटर में लगे कैमरे की पहुंच से बाहर है | वेबसाइट एविएशन वीक के मुताबिक, चांद के साउथ पोल इलाके में जहां लैंडर विक्रम संपर्क से बाहर हुआ है, वहां लंबी छाया पड़ने के चलते कैमरा ठीक से तस्वीरें नहीं ले सका | दरअसल चांद में दो हफ्ते के दिन के बाद फिर से रात होने वाली है | ऐसे में इस बदलाव के दौर में वहां के ज्यादातर इलाकों को छांव ने घेर रखा है | ऐसे में 'लूनर रिकॉनिस्सेंस ऑर्बिटर कैमरे' (LROC) वहां की तस्वीरें नहीं ले सका | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान 2 के लिए देश और दुनिया से मिले समर्थन का शुक्रिया अदा किया है |
इसरो के वैज्ञानिक ने बताया है कि मिशन का सिर्फ 5 फीसदी हिस्सा ही प्रभावित हुआ है | 95 फीसदी हिस्सा काम करता रहेगा | 5 फीसदी हिस्से में सिर्फ लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान से संपर्क टूटा है | इसकी वजह से चंद्रमा की सतह के बारे में जानकारी तो नहीं मिल पाएगी, लेकिन मिशन के बाकी 95 फीसदी एक्टिव हिस्से से दूसरी तरह की जानकारी मिलती रहेगी | इसरो ने 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस स्टेशन से चंद्रयान-2 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया था | चंद्रयान-2 के तीन हिस्से थे | ऑर्बिटर, लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान | रोवर लैंडर के अंदर ही है, जबकि ऑर्बिटर चांद के चारों तरफ चक्कर लगा रहा है | ये एक साल तक चांद की तस्वीरें भेजता रहेगा |

