विक्रम लैंडर चांद की विपरीत कक्षा में शिफ्ट हुआ, अब चांद बस मुट्ठी में है
इसरो (ISRO) के वैज्ञानिकों ने आज (मंगलवार) सुबह विक्रम लैंडर को चांद की विपरीत कक्षा में शिफ्ट कराया है | ये शिफ्टिंग सुबह 8.50 बजे कराई गई | विक्रम लैंडर चंद्रयान-2 (Chandrayaan-2) से अलग होने के बाद लगभग 20 घंटे तक ऑर्बिटर की कक्षा में ही चक्कर लगाया | अब ये ऑर्बिटर से विपरीत कक्षा में चक्कर लगा रहा है | इस घटना को वैज्ञानिक डिऑर्बिट कहते हैं | विक्रम लैंडर 7 सितंबर को चांद की सतह पर उतरेगा | इसे चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारा जाएगा | सतह पर उतरने से पहले विक्रम लैंडर लगभग 2 किमी प्रति सेकंड की गति से चांद के चारों तरफ चक्कर लगाता रहेगा | दो सितंबर को लैंडर ‘विक्रम’ ऑर्बिटर से अलग होने के बाद यह सात सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करेगा | ऐसा करके भारत चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा |
भारत से पहले रूस, अमेरिका और चीन चांद पर पहुंच चुके हैं लेकिन वे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में नहीं पहुंच पाए थे | लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद इसके भीतर से ‘प्रज्ञान’ नाम का रोवर (Pragyan Rover) बाहर निकलेगा और अपने 6 पहियों पर चलकर चांद की सतह पर वैज्ञानिक प्रयोग करेगा | चंद्रयान-2' मिशन की सफलता भारत के लिए गौरवशाली क्षण होगा क्योंकि चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है | इससे चांद के अनसुलझे रहस्य जानने में मदद मिलेगी | यह ऐसी नई खोज होगी, जिसका भारत और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा | 15 जुलाई को रॉकेट में तकनीकी खामी का पता चलने के बाद ‘चंद्रयान-2' का प्रक्षेपण टाल दिया गया था | समय रहते खामी का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक समुदाय ने इसरो की सराहना की थी |

