सऊदी अरब पर हुए हमले से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना तय
सऊदी अरब ने अरामको के दो तेल संयंत्रों पर हुए ड्रोन हमलों(Drone Attack) के बाद तेल और गैस उत्पादन में 50 प्रतिशत की कटौती की थी। ब्रिटेन की प्रसारण कंपनी सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलाजिज बिन सलमान ने शनिवार को बताया था कि ड्रोन हमले के कारण कच्चे तेल के उत्पादन में एक दिन में 57 लाख बैरल यानी लगभग 50 प्रतिशत की कटौती हुई है। हमले के बाद सोमवार को ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में 28 साल का सबसे बड़ा उछाल आया। सोमवार को इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड(Brent Crude) की कीमतों में 20 फीसदी की तेजी आई।
14 जनवरी, 1991 के बाद इंट्रा-डे (एक दिन में) में यह सबसे बड़ा उछाल है। कच्चा तेल महंगा होने से भारत पर बड़ा असर होगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे देश में पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में बड़ा उछाल आ सकता है। अगले 15 दिन में पेट्रोल के दाम 5-7 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ सकते है। लिहाजा महंगाई बढ़ने की आशंका भी तेज हो गई है। ऑयल प्राइस डॉट कॉम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड 19.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 71.95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 28 साल में एक दिन की सबसे बड़ी तेजी है।
सऊदी अरब दुनिया का सबसे ज्यादा तेल एक्पोर्टर है और सरकारी तेल प्रोड्यूसर सऊदी अरामको पर हमले के चलते कंपनी ने आपूर्ति में 57 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती की है, जो वैश्विक आपूर्ति का 6 फीसदी है। भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए सऊदी अरब महत्वपूर्ण सोर्स है। भारत के लिए सऊदी अरब कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। ऐसे में इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर भारत पर भी पड़ेगा। कच्चे तेल की कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। कच्चा तेल महंगा होने का असर रुपये पर भी पड़ेगा और रुपये में 5 से 8 फीसदी तक कमजोरी आ सकती है। महंगा कच्चा तेल और कमजोर रुपये से अगले 10 दिनों में देश पेट्रोल की कीमतों में 7 रुपये तक बढ़ोतरी हो सकती है।
कीमतों में तेजी से भारत के तेल आयात बिल के साथ-साथ राजकोषीय घाटे पर भी बुरा असर पड़ने वाला है। वित्त वर्ष 2018-19 के दौरान भारत ने अपने कच्चे तेल के आयात पर करीब 111.9 अरब डॉलर खर्च किया था।


