कश्मीर छोड़ो पाकिस्तान
ये गजब है या अजब मगर है सच, पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में , कश्मीर के लोगो ने पाकिस्तानी सेना का ट्रक रोक लिया और कश्मीर छोड़ने के नारे लगाये। इससे इमरान की मुश्किलें और बढ़ गई है क्योकि बलूचिस्तान में पहले से ही नारे लग रहे है कि पाकिस्तान में नही है बलूचिस्तान और अब कश्मीर के लोग भी उसके साथ नही रहना चाहते | अब तो पाकिस्तान में कई मुस्लिम कहने लगे है कि उनके पूर्वज हिन्दू थे | कुछ संधियों के तहत कुछ रियासतें ऐसी थी जिन पर ब्रिटिश सम्राज्य का सीधा शासन नहीं था। ऐसी रियासतें अपने आंतरिक फैसले लेने के लिए स्वतंत्र थी। इन रियासतों को ये अधिकार था कि वे भारत और पाकिस्तान दोनों में से किसी भी देश के साथ विलय कर सकती है या फिर स्वयं को स्वतंत्र राष्ट्र घोषित कर सकते हैं। उनमें से एक बलूचिस्तान (कलात, खारान, लॉस बुरा और मकरान) की रियासतें भी थी। बलूचिस्तान ने स्वतंत्र रहने की इच्छा व्यक्त की।
4 अगस्त 1947 को लार्ड माउंटबेटन, मिस्टर जिन्ना, जो बलूचों के वकील थे, सभी ने एक कमीशन बैठाकर तस्लीम किया और 11 अगस्त को बलूचिस्तान की आजादी की घोषणा कर दी गई। विभाजन से पूर्व भारत के 9 प्रांत और 600 रियासतों में बलूचिस्तान भी शामिल था। हालांकि इस घोषणा के बाद भी माउंटबेटन और पाकिस्तानी नेताओं ने 1948 में बलूचिस्तान के निजाम अली खान पर दबाव डालकर इस रियासत का पाकिस्तान में जबरन विलय कर दिया। अली खान ने बलोच संसद से अनुमति नहीं ली थी और दस्तावेजों पर दस्तखत कर दिए थे। बलूच इस निर्णय को अवैधानिक मानते हैं, तभी से राष्ट्रवादी बलोच पाकिस्तान की गुलामी से मुक्त होने के लिए संघर्ष छेड़े हुए हैं।



