भारत में अब तक का सबसे बड़ा निवेश सऊदी अरब से
कश्मीर पर इमरान ख़ान मुस्लिम देशों से लामबंद होने की अपील लगातार कर रहे हैं लेकिन इसी बीच मुकेश अंबानी ने घोषणा कर दी कि सऊदी अरब की तेल कंपनी अरामको अब तक का सबसे बड़ा निवेश भारत में करने जा रही है। यह सऊदी की सरकारी कंपनी है और इस पर नियंत्रण किंग सलमान का है। यह घोषणा इमरान ख़ान की चाहत के बिल्कुल उलट रही। इमरान ख़ान अक्सर मुस्लिम वर्ल्ड का ज़िक्र करते हैं लेकिन सऊदी अरब में भारत के राजदूत रहे तलमीज़ अहमद कहते हैं कि मुस्लिम वर्ल्ड हक़ीक़त में कुछ है ही नहीं। वो कहते हैं, ''जब हम मुस्लिम वर्ल्ड कहते हैं तो ऐसा लगता है कि कोई एकीकृत और एकजुट दुनिया है जिसमें सारे मुस्लिम देश हैं, जो कि है नहीं क्योंकि दुनिया की राजनीति मुनाफ़े के आधार पर आगे बढ़ रही न कि मजहबी समानता के आधार पर।'' फ़ाइनैंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार क्राउन प्रिंस सलमान से इसी दो दिवसीय दौरे में मुकेश अंबानी की मुलाक़ात हुई थी और अंबानी की फ़्लाइट मुंबई में देर हुई तो सलमान ने इंतज़ार भी किया। इसी मुलाक़ात में सऊदी की तेल कंपनी अरामको और मुकेश अंबानी की कंपनी आरआईएल(RIL) ऑइल-टु-केमिकल के बीच डील की बुनियाद रखी गई। अब तक का सबसे बड़ा एफडीआई: पिछले हफ़्ते 12 अगस्त को एशिया के सबसे अमीर शख़्स और रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने अपने शेयर होल्डर्स के साथ वार्षिक बैठक में घोषणा करते हुए बताया कि सऊदी की तेल कंपनी अरामको आरआईएल ऑइल-टु-केमिकल का 20 फ़ीसदी शेयर ख़रीदेगी। इसे भारत में इतिहास का सबसे बड़ा निवेश बताया जा रहा है

आरआईएल ऑइल-टु-केमिकल 75 अरब डॉलर की कंपनी है और इसका 20 फ़ीसदी शेयर अरामको ख़रीदने जा रही है। यानी अरामको 15 अरब डॉलर का निवेश करेगी। 2018 में कुल 42 अरब डॉलर का निवेश और 2019 में एक ही कंपनी से 15 अरब डॉलर का निवेश आया है। इसे एक बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। इससे पहले एस्सार की तेल और गैस कंपनी में रूस की रॉसनेफ़्ट कंपनी ने 12 अरब डॉलर का निवेश किया था। सऊदी ने इतना बड़ा निवेश क्यों किया: मुकेश अंबानी की रिलायंस और अरामको की डील को दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादक देश सऊदी अरब और सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता में से एक भारत के बीच काफ़ी अहम माना जा रहा है। अरामको दुनिया की सबसे ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने वाली कंपनी है। पिछले साल अरामको को 111.1 अरब डॉलर का मुनाफ़ा हुआ था। यह किसी भी एक कंपनी की सबसे बड़ी कमाई है। इससे पहले यह उपलब्धि एप्पल आईफ़ोन के नाम थी। 2018 में एप्पल की कमाई 59.5 अरब डॉलर ही थी। इन सवालों के जवाब में तेल इंडस्ट्री की अर्थव्यवस्था पर क़रीब से नज़र रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता कहते हैं कि सऊदी या खाड़ी के देशों के लिए एशिया ही बाज़ार है. वो कहते हैं कि पश्चिम में तेल का बाज़ार सिमट रहा है। ऐसे में भारत में इतना बड़ा निवेश चौंकाता नहीं है लेकिन यह भारत के भी हक़ में है। वो कहते हैं, ''जामनगर में मुकेश अंबानी की दुनिया की बसे बड़ी तेल रिफ़ाइनरी है. भारत अपनी ज़रूरत का 80 फ़ीसदी से ज़्यादा तेल आयात करता है। इसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया और गल्फ़ से आ रहा है। सऊदी और अमरीका के संबंध भी अच्छे हैं इसलिए यह एक लंबी अवधि का रिश्ता बनने जा रहा है। हम केवल तेल आयात ही नहीं कर रहे बल्कि रिलायंस की जामनगर रिफ़ाइनरी से तेल विदेशों में निर्यात भी होता है।''एक बात यह भी कही जा रही है तेल के वैश्विक अर्थशास्त्र में बुनियादी परिवर्तन आया है. तेल के मामले में अमरीका ने ख़ुद को आत्मनिर्भर बना लिया है। पिछले साल दिसंबर के दूसरे हफ़्ते में अमरीका तेल का निर्यातक देश बन गया था. ऐसा पिछले 75 सालों में पहली बार हुआ है क्योंकि अमरीका अब तक तेल के लिए विदेशों से आयात पर ही निर्भर रहता था।




