क्या आप जानते हैं कि आपको आपसे चोरी कर लिया गया है
क्या आप जानते हैं कि आपको आपसे चोरी कर लिया गया है | आपके दिमाग़ पर डाका पड़ चुका है और आपको ख़बर तक नहीं | हम देखने में मनुष्य लगते हैं लेकिन हमें तेज़ी से रोबोट बनाया जा रहा है | हमारी सोच अलग-अलग रंग बिरंगी स्क्रीन्स में बांध दी गई है और उंगलियां व्हट्सएप, ट्विटर और फेसबुक ने टेढ़ी कर डाली हैं | आप कह सकते हैं कि मैं ये कैसी सठियाई हुई बातें कर रहा हूं, हम तो आज भी वैसे ही हैं | दिल धड़क रहा है, दिमाग सोच रहा है | अपनी मर्जी से जो चाहें कर सकते हैं और कर रहे हैं | बस यही तो खूबी है उस डाके की जो पड़ चुका, उस दिमाग की जिसकी जेब काटी जा चुकी और एक ही रंग और साइज़ के कपड़े जो मुझे और आपको पहनाए जा चुके हैं | और सब इतनी सफाई से हुआ कि मुझे और आपको महसूस तक नहीं हो रहा | ये जो हर शाम सात से रात 12 बजे तक सैंकड़ों स्क्रीनों पर अलग-अलग रंगों के तोते, हम और आप बिना पलक झपकाए देखते रहते हैं, कभी ध्यान दिया कि इन सबकी टें टें एक ही तरह की क्यों होती है | अगर इसका नाम ही बोलने की आज़ादी है तो इस टें टें के मुकाबले हम और आप छत पर चढ़कर चीखते हैं कि शट-अप, मेरी बात सुनो मैं कुछ अलग से कहना चाहता हूं | पता है इसके बाद क्या होगा. आपके घरवाले ना सही लेकिन आजू-बाजू वाले ज़रूर कहेंगे इसकी बुद्धि सरक चुकी है, यह पागल हो चुका है इसे डॉक्टर के पास ले जाओ | आप बदले में कहके देखें कि बुद्धि मेरी नहीं उन तोतों की सरक चुकी हैं जो रोजाना टीवी पर अलग-अलग शक्लें और नाम सजाए एक ही राग कोरस में गा रहे हैं | ये सैकड़ों तोते अपनी मर्जी से थोड़ा कोरस में टें टें कर रहे हैं | उन्हें इसके बहुत पैसे मिलते हैं | कौन कितने लाख लोगों को कितने लाख में कितनी देर तक पागल बनाकर रख सकता है, आस-पास कितना टन डर फैला सकता है, कितने व्यक्तियों और वर्गों को असुरक्षित कर सकता है, कितने करोड़ लोगों को फिर उसी ढंग से पुराने सपनों की उतरन बेच सकता है कि जिनकी सच्चाई पर कोई सवाल करे तो उसे बाकी लोग पत्थर मारे | क्या इस सब कारोबार से मुक्ति मिल सकती है | हां मिल सकती है | मगर मुक्ति चाहता कौन है | एक बलात्कार पर हज़ारों का जुलूस निकालने वाले रोज़ाना करोड़ों दिमागों के बलात्कार के ख़िलाफ़ कितनी बार सड़क आए या आएंगे, कैसे आएंगे | दिमाग तो चुराए जा चुके, दिलों पर डाका पड़ चुका | जो चंद इस बाढ़ में बच गए उन्हें पागलखाने में रखा जा रहा है | क्या आपकी गाड़ी या मोटरसाइकल का साइलेंसर कारखाने की चिमनी से पैदा होने वाला धुआं ही हानिकारक है | कभी सोचा कि टीवी स्क्रीन से निकलने वाला धुआं कितना नुकसानदेह है |





