आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का स्वरूप कैसा होगा?
गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पेश किया | इस बिल पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया | नए सरकारी आदेश के मुताबिक, अब जम्मू-कश्मीर में 370 के सभी खंड लागू नहीं होंगे | सिर्फ एक खंड प्रभावी रहेगा. दूसरा सबसे अहम फैसला यह है कि जम्मू-कश्मीर अब राज्य नहीं होगा | इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख में बांटा गया है | अमित शाह ने सदन में ये भी समझाया कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का स्वरूप कैसा होगा ? अमित शाह ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक 2019 के भाग 2 और 3 में कहा गया है कि इसके तहत एक नए संघ शासित क्षेत्र लद्दाख का सृजन होगा | प्रस्तावित संघ शासित क्षेत्र लद्दाख बिना विधायिका का होगा | इस विधेयक के तहत एक अन्य संघ शासित क्षेत्र जम्मू-कश्मीर सृजित होगा, जिसमें विधायिका होगी | जम्मू-कश्मीर में अब तक 22 जिले थे | दो केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में 20 और लद्दाख में 2 जिले होंगे |
केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर के हिस्से में अनंतनाग, बांदीपोरा, बारामूला, बड़गाम, डोडा, गांदरबल, जम्मू, कठुआ, किश्तवाड़, कुलगाम, पुंछ, कुपवाड़ा, पुलवामा, रामबन, रसाई, राजौरी, सांबा, शोपियां, श्रीनगर, उधमपुर जिले आएंगे | वहीं, लद्दाख के हिस्से में दो जिले लेह और करगिल होंगे | क्षेत्रफल के हिसाब से लेह भारत का सबसे बड़ा जिला है | यह 45,110 वर्ग किलोमीटर में फैला है | जम्मू-कश्मीर संघ शासित क्षेत्र के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 239 के अंतर्गत एक प्रशासक नियुक्त किया जाएगा, जिसे संघ शासित क्षेत्र के उपराज्यपाल के रूप में पदनामित किया जाएगा | गृहमंत्री शाह ने लोकसभा में बताया कि जम्मू-कश्मीर संघ शासित प्रदेश के लिए एक विधानसभा होगी और प्रत्यक्ष चुनावों द्वारा चुने गए व्यक्तियों से भरी जाने वाली सीटों की कुल संख्या 107 होगी | उन्होंने बताया कि जब तक पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर संघ शासित प्रदेश के भू भाग का अधिग्रहण नहीं होता है और उस क्षेत्र में रह रहे लोग अपने प्रतिनिधि नहीं चुनते हैं, तब तक विधानसभा में 24 सीटें रिक्त रहेंगी |


