अजीत डोभाल के 10 बड़े कारनामे
1945 में गढ़ वाल उत्तराखंड में जन्मे, पिता भारतीय सेना में ब्रिगेडियर के पद पर रहे। 1968 में आईपीएस में टॉप किया, 17 साल की उम्र में मिलने वाले मैडल 6 साल में पा लिये, 1972 में आईबी में आये, जिसने बलूचिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाया, जो पाकिस्तान सेना में मार्शल तक पहुँचे, कई साल वहाँ रहे। इनके बहुत सारे किस्से है। सबके बारे में जानने में समय लग सकता है। इनके कुछ खतरनाक और मशहूर कारनामे आपको बताते हैं।

1. भारतीय सेना के एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के दौरान उन्होंने एक गुप्तचर की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका। इस दौरान उनकी भूमिका एक ऐसे पाकिस्तानी जासूस की थी, जिसने खालिस्तानियों का विश्वास जीत लिया था और उनकी तैयारियों की जानकारी मुहैया करवाई थी।
2. यह अजित डोभाल का ही कमाल था कि 1971 से लेकर 1999 तक 5 इंडियन एयरलाइंस के विमानों के संभावित अपहरण की घटनाओं को टाला जा सका था। जब 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आईसी-814 को काठमांडू से हाईजैक कर लिया गया था तब उन्हें भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार बनाया गया था।
3. कश्मीर में भी उन्होंने उल्लेखनीय काम किया था और उग्रवादी संगठनों में घुसपैठ कर ली थी। उन्होंने उग्रवादियों को ही शांतिरक्षक बनाकर उग्रवाद की धारा को मोड़ दिया था। उन्होंने एक प्रमुख भारत-विरोधी उग्रवादी कूका पारे को अपना सबसे बड़ा भेदिया बना लिया था।
4. डाभोल ने 2015 में पूर्वोत्तर में सेना पर हुए हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई और भारतीय सेना ने सीमा पार म्यांमार में कार्रवाई कर उग्रवादियों को मार गिराया। भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना और एनएससीएन खाप्लांग गुट के बागियों के सहयोग से ऑपरेशन चलाया, जिसमें करीब 30 उग्रवादी मारे गए हैं।
5. वह सात साल तक पाकिस्तान में एक गुप्त एजेंट बन के रहे थे। वह पाकिस्तान सेना में मार्शल तक पहुँचें।
6. वह अपनी सराहनीय सेवा एवं काम के लिए पुलिस पदक पाने वाले अब तक के सबसे कम उम्र के पुलिस अधिकारी है।
7. 1988 में डोभाल को भारत के सर्वोच्च शांतिकाल वीरता पुरस्कार ‘कीर्ति चक्र’ से सम्मानित किया गया। वह ऐसे पहले पुलिस अधिकारी है, जिन्हे पहले से ही सैन्य सम्मान के रूप में एक पदक प्राप्त है।
8. 30 मई 2014 को अजित डोभाल को भारत के पांचवें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया। वर्तमान में डोभाल नमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कार्य करते हुए भारत के पांचवे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं।
9. आई एस आई एस के गड से 45 नर्सों को बिना किसी दुर्घटना और नुकसान के बहार निकाल लेना कोई छोटी बात नहीं। इन्होनें अपने इस कारनामे से आई एस आई एस के हौसले को तोड़ दिया था।
10. 31 जनवरी 2005 को डोभाल खुफिया ब्यूरो के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए।
अगर उस समय की स्थानीय सरकार ने साथ दिया होता तो दाऊद आज जहन्नुम में होता। ऐसे व्यकि को तो भारत रत्न मिलना चाहिये- जो जेम्स बांड से भी ज्यादा खतरनाक, जिसकी सोच चाचा चौधरी से भी तेज है।
























