जानिये अरुण जेटली के राजनीतिक सफर के बारे में
BJP नेता अरुण जेटली का 67 साल की उम्र में निधन हो गया | आज दोपहर 12.7 बजे उन्होंने एम्स में आखिरी सांस ली | पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को अपनी बीमारी की गंभीरता का अहसास काफी पहले ही हो चुका था | तभी उन्होंने दूसरी बार नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर उनके कैबिनेट में शामिल होने से विनम्रता पूर्वक मना कर दिया था | अरुण जेटली मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में दूसरे नंबर के सबसे अहम शख्सियत माने जाते थे | उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भी अहम भूमिका निभाई थी | शुरुआती करियर की बात करें तो 1990 में अरुण जेटली ने सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील में रूप में नौकरी शुरू की | वीपी सिंह सरकार में उन्हें 1989 में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया था | उन्होंने बोफोर्स घोटाले की जांच में पेपरवर्क भी किया |
जेटली देश के टॉप 10 वकीलों में से एक माने जाते रहे हैं | जेटली 1991 में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बने | प्रखर प्रवक्ता और हिन्दी और अंग्रेजी-भाषाओं में उनके ज्ञान के चलते 1999 के आम चुनाव में बीजेपी ने उन्हें प्रवक्ता बनाया | अटल बिहारी सरकार में उन्हें सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया | इसके बाद उन्हें विनिवेश का स्वतंत्र राज्यमंत्री बनाया गया | जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्ली के नारायणा विहार इलाके के मशहूर वकील महाराज किशन जेटली के घर हुआ | इनकी प्रारंभिक शिक्षा नई दिल्ली के सेंट जेवियर स्कूल में हुई | 1973 में इन्होंने श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से कॉमर्स में स्नातक की पढ़ाई पूरी की | इसके बाद उन्होंने यहीं से लॉ की पढ़ाई की | छात्र जीवन में ही जेटली राजनीतिक पटल पर छाने लगे | वह 1974 में वे दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र संघ अध्यक्ष चुन लिए गए | 1974 में अरुण जेटली अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ गए | 1975 में आपातकाल का विरोध करने के बाद उन्हें 19 महीनों तक नजरबंद रखा गया | 1973 में उन्होंने जयप्रकाश नारायण और राजनारायण द्वारा चलाए जा रहे भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई |






















