पॉक्सो कानून में अब यौन अपराध पर मृत्युदंड देने का प्रावधान शामिल
बच्चों के साथ यौन अपराध करने वालों को अब फांसी की सजा दी जा सकेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को इसके लिए यौन अपराध संरक्षण (पॉक्सो) कानून में जरूरी संशोधनों को मंजूरी दे दी है। कानून में संशोधन में बाल पोर्नोग्राफी पर लगाम लगाने के लिए सजा और जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सूचना व प्रसारण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने कहा है कि कैबिनेट ने बच्चों के प्रति अपराधों की गंभीरता को देखते हुए इससे निपटने के लिए पॉक्सो कानून में संशोधनों को मंजूरी दी है।कानून में बच्चों के खिलाफ यौन अपराध करने वालों को मृत्युदंड देने का प्रावधान शामिल किया गया है। सरकार ने कहा कि इन संशोधनों से बाल यौन उत्पीड़न पर अंकुश लगने की उम्मीद है क्योंकि कानून में शामिल किए गए मजबूत दंडात्मक प्रावधान निवारक का काम करेंगे।
जावड़ेकर ने कहा है कि इसकी मंशा परेशानी में फंसे असुरक्षित बच्चों के हितों का संरक्षण करना तथा उनकी सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने की है। संशोधन का उद्देश्य बाल उत्पीड़न के पहलुओं तथा इसकी सजा के संबंध में स्पष्टता लेकर आने का है।
क्या है पॉक्सो एक्ट जाने
बच्चों के साथ आए दिन यौन अपराधों की ख़बरें समाज को शर्मसार करती नजर आती हैं | इस तरह के मामलों की बढ़ती संख्या देखकर सरकार ने वर्ष 2012 में एक विशेष कानून बनाया था | जो बच्चों को छेड़खानी, बलात्कार और कुकर्म जैसे मामलों से सुरक्षा प्रदान करता है | उस कानून का नाम पॉक्सो एक्ट | पॉक्सो शब्द अंग्रेजी से आता है | इसका पूर्णकालिक मतलब होता है प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट 2012 यानी लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012 | इस एक्ट के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में कार्रवाई की जाती है | यह एक्ट बच्चों को सेक्सुअल हैरेसमेंट, सेक्सुअल असॉल्ट और पोर्नोग्राफी जैसे गंभीर अपराधों से सुरक्षा प्रदान करता है | 18 साल से कम उम्र के बच्चों से किसी भी तरह का यौन व्यवहार इस कानून के दायरे में आ जाता है | यह कानून लड़के और लड़की को समान रूप से सुरक्षा प्रदान करता है | इस कानून के तहत पंजीकृत होने वाले मामलों की सुनवाई विशेष अदालत में होती है |






















