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मेधज के सौजन्य से आज सरकारी अस्पताल लखनऊ में गरीब मरीजों के लिए खिचड़ी का वितरण हुआ

Medhaj News 1 Dec 19 , 06:01:39 Medhaj Corner
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मेधज के सौजन्य से आज फिर लोकबंधु हॉस्पिटल LDA कॉलोनी कानपुर रोड पर गरीब वर्ग के लिये खिचड़ी खिला के सेवा की गई । ये शानदार अवसर मेधज की ओर से छठी बार था। आपको बता दे कि मेधज की ओर से खिचड़ी का वितरण हर गुरुवार और शनिवार को सरकारी अस्पतालो में होता है | मगर खिचड़ी ही क्यो कुछ औऱ क्यो नही। खिचड़ी आसानी से बनने और बटने के साथ साथ पोष्टिक भी होती है। सभी धर्मों में खिचड़ी लगभग 2000 साल पुराना तो है ही, खिचड़ी बहुत अच्छा शब्द है, तंज कसने के भी काम आता है, बीरबल की खिचड़ी आदि, खिचड़ी बहुत देशों मे बनती है मगर अलग अलग नाम से , वैसे यह भोज्य भारत का है, हर घर मे बनता है, बीमार या पेट को आराम देने में खासकर बनता है,





भारत मे भी कई नाम से बनती है जैसे तमिलनाडु में बेन पोंगल, खरा पोंगल, दूधिया पोंगल, मीठी सक्करई, हिमाचल और उत्तराखंड में बलाई और गढ़वाली खिचड़ी, खिचड़ी की रानी है अवध की खिचड़ी। सभी शासक इसे बड़े चाव से खाते थे, खिचड़ी रूस में इब्न बतूता नाम से बनती है, द्वितीय विश्व युद्ध मे कोशरी नाम से बना था, जो अंग्रजो को पसंद आया और वो इसकी बनाने की कला अपने साथ ले गये, धीमी आंच पर पके तो ऑलिव खिचड़ी, दुबई के पॉश रेस्टोरेंट में बीरबल की खिचड़ी मिलती है, ऑलिव या बीरबल की खिचड़ी बनाने का तरीका एक जैसा है,जो 48 व्यंजन डाल कर बनती है, बैकॉक में फिश खिचड़ी लोकप्रिय व्यजन है।





महाभारत काल मे द्रोपदी ने पांडवो को खिचड़ी खिलाई थी जिसका एक चावल कृष्ण ने चखा था, जिसे खिचचा और कृष्णनय कहा गया, चाणक्य ने भी इससे मिलते जुलते पकवान का जिक्र किया है, जहाँगीर के समय जी मुगलई खिचड़ी अब लजीजान जान हो गई। कर्बला युद्ध मे भी खिचड़ी बनी थी और जब गुरुकुल चलते थे तब ज्यादा समय खिचड़ी ही बनती थी, वेदों में भी इसका उल्लेख है |


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