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मैं हूँ बहता चला
मैं हूँ बहता चला समीर की तरह, ऊँची बुलंदियों को छूता हुआ। बिना रुके बिना थके, बिना किसी से कुछ कहे, अपनी रह को बुनता हुआ। मैं हूँ बहता चला..... घने अँधेरो को चीरता हुआ, कई ज़िन्दगी को रौशनी देता हुआ। न जाने कितने आँधी तूफानो को,
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जज़्बा
मुश्किलें जरुर है, मगर ठहरा नही हूं मैं मंज़िल से जरा कह दो, अभी पहुंचा नही हूं मैं कदमो को बांध न पाएंगी, मुसीबत कि जंजीरें, रास्तों से जरा कह दो, अभी भटका नही हूं मैं सब्र का बांध टूटेगा, तो फ़ना कर के रख दूंगा, दुश्मन से जरा कह दो, अभी
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जीत लेंगे हम
कितने भी बिखरे हों हालात, उन्हें समेट लेंगे हम; ज़िन्दगी के बिखरे कतरों को, फिर से लपेट लेंगे हम। ज़िन्दगी एक समुंदर है, तो तूफां तो आएंगे ही; आने दो तूफां को, उसे भी देख लेंगे हम। कमज़ोर नहीं इतने भी, कि- चंद हालातों से टूट
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अनिश्चित समय
जैसा कि समय बहुत तेज़ी से बदल रहा है और यक़ीनन कहीं न कहीं हम सब में समय, कुछ न कुछ बदलाव ला ही रहा है। तो हम सबको ऐसा कुछ करने की कोशिश करनी चाहिए कि समय के इशारे को समझ कर, कुछ सकारात्मक बदलाव खुद से ही कर लिये जाएँ। क्योंकि जब समय तेजी
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सीख रही हूँ
सीख रही हूँ प्रतिदिन, जीवन जीने के नए तरीके; मुस्कुरा कर ज़ख्मों को, सहने के नए तरीके। यहाँ हर एक की पसंद, और फरमाइशें अलग हैं; सीख रही हूँ प्रेम से 'नहीं', कहने के कुछ तरीके। उम्मीदें हैं कुछ अपनों की, जो मेरी चाहतों पर भारी
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धारणा
हर बार तो वही बात होती है, एक ही समस्या सबके पास होती है। जो है पास में उसकी क़द्र नहीं होती है, और सारी दुनिया में ख़ुशी की तलाश होती है । जिन बातों को नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ा जा सकता है, असल ज़िन्दगी में वही सबसे बड़ा बवाल होती है। लोगों
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लिखता हूँ……
मैं पलटकर, एक किताब लिखता हूँ;, मैं फिर से, एक ख्याल लिखता हूँ। हिस्सों में, किस्सों को लिखता हूँ; कुछ अपनी, तो कुछ दूसरों की लिखता हूँ। तोड़ के, जोड़ के, एक कहानी लिखता हूँ; थक जाता हूँ शाम को, तो सुबह को लिखता हूँ। कुछ होश में, तो कुछ
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भीड़ में भी तन्हां हूँ
लड़ रहा हूँ जिंदगी की उस जंग से, जहाँ जीत तो मेरी है, मगर हासिल कुछ भी नहीं। घिरा हूँ चारों दिशाओं से, जहाँ भीड़ तो अपनी है, मगर साथी कोई भी नहीं। रोज़ निकलता हूँ उन्हीं रास्तों से, जिन पर मिलते तो कई हैं, मगर जानता कोई भी
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अंतर्द्वंद
जीती अगर अंतर्द्वंद्व की पीड़ा,तो देह मात्र रह जायेगा। फिर न व्यथा होगी-न कथा होगी, सब धूं-धूं करके जल जायेगा। आकाश तो जगमगायेगा, मगर भूमि पर कहीं अंधकार रह जायेगा। समय का सफर है, समय के साथ गुज़र जायेगा। थोड़ा सा हौसला हो, तो जीवन
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कहता है दिल ये मेरा...
मैं राग हूँ तेरे जीवन का, तू है जीवनगीत मेरा; मैं प्रीत तेरे एहसासों की, तू है मनमीत मेरा। °°°°°° मैं सरगम हूँ तेरे साजों की, तू है संगीत मेरा; हूँ झंकार मैं तेरे जीवन की, तू है अलंकार मेरा। °°°°°° काव्य मैं तेरे जीवन का, पर भाव है तू



