कहता है दिल ये मेरा...
कहता है दिल ये मेरा...
मैं राग हूँ तेरे जीवन का,
तू है जीवनगीत मेरा;
मैं प्रीत तेरे एहसासों की,
तू है मनमीत मेरा।
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मैं सरगम हूँ तेरे साजों की,
तू है संगीत मेरा;
हूँ झंकार मैं तेरे जीवन की,
तू है अलंकार मेरा।
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काव्य मैं तेरे जीवन का,
पर भाव है तू इसका;
सुगंध मैं तेरे बगिया की,
पर फूल है तू इसका।
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मैं तेरे घर की दिवाली,
रौशन दीप है तू इसका;
तू मेरे दिल की धड़कन है,
और मैं तेरी हृदयकर्णिका।
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इंद्रधनुष का रंग हूँ मैं,
तू है आकाश मेरा,
प्रेम मैं तेरे अंतर्मन का,
तू है विश्वास मेरा।
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मैं तेरे जीवन की उपमा हूँ,
श्रृंगार है तू मेरा;
तू मेरे जीवन में आया,
ये उपकार है ईश्वर का।
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माना मैं तेरी जैसी नहीं,
पर तू भी कहाँ है, मुझ सा?
फिर भी साथ हमारा ऐसा है,
जैसे सागर में मिलती है सरिता।
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तू धीर-गम्भीर स्थिर पर्वत सा,
मैं हूँ परिक्रमा करती धरा;
समझदारी भरा है व्यक्तित्व तेरा,
और पागल मन है मेरा।
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जो मैं चाहत हूँ तेरे दिल की,
तू भी तो अरमां है मेरा।
मैं तेरे जीवन की मलिका हूँ ,
और तू शहंशाह है मेरा।
**(भावना मौर्य)**

















