अंतर्द्वंद
Medhaj News 3 Dec 19,20:26:33 Special Story
जीती अगर अंतर्द्वंद की पीड़ा,तो देह मात्र रह जायेगा।
फिर न व्यथा होगी-न कथा होगी, सब धूं-धूं करके जल जायेगा।
आकाश तो जगमगायेगा, मगर भूमि पर कहीं अंधकार रह जायेगा।
समय का सफर है, समय के साथ गुज़र जायेगा।
थोड़ा सा हौसला हो, तो जीवन एक और तजुर्बे से भर जायेगा।
यही वो प्रारब्ध है, जहां मन की ना मिले और मन- से न मिले,
सहन कर जाओ तो एक नया प्रारब्ध बन जायेगा।
जीती अगर अंतर्द्वंद की पीड़ा,तो......
तमस को रहना ही है और तमस को सहना ही है,
अंधकार को समझ लिया, तो ज्ञान खुद ब खुद आ जायेगा।
निश्चय ही हार कर राह बदलना आसान है,
मगर जो तप गया, तो बस उसी का मोल रह जायेगा।
संघर्ष हर किसी का अनमोल है, ----(प्रज्ञा शुक्ला)----
मगर जो जीता नहीं और हारा नहीं, बस उसी का नाम दोहराया जायेगा।






















