15 साल पहले आतंकियों ने किया था लोकतंत्र के मंदिर पर हमला! शहीदों को नमन
आज से ठीक 15 साल पहले 13 दिसंबर 2001 को लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने भारतीय लोकतंत्र के मंदिर पर हमला किया था। इस हमले में कुल 9 लोगों ने अपनी जान गंवा दी। जिसमें 6 दिल्ली पुलिस के जवान थे। जबकि हमला कर 5 आतंकियों को सेना ने मार गिराया था।
सफेद रंग की अंबेसडर में आए थे आतंकी
आमतौर पर संसद परिसर में कोई सफेद रंग की अंबेसडर कार आती है तो कोई विशेष ध्यान नहीं देता है। इसी का फायदा उठाते हुए आतंकियों ने सफेद अंबेसडर का इस्तेमाल कर संसद परिसर में घुस आए और लोकतंत्र के मंदिर को 45 मिनट तक गोलियों से छलनी करते रहें। अचानक हुए हमले का सुरक्षाबलों ने मुंहतोड़ जवाब देना शुरू किया और आतंकियों से जमकर मुकाबला किया। मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस के 6, सीआरपीएफ की एक महिला कांस्टेबल और संसद परिसर के दो गार्ड शहीद हो गए। जबकि 16 जवान घायल हुए थे।
सेना की वर्दी में आए थे आतंकी
आतंकी सेना की वर्दी पहने हुए सफेद अंबेसडर कार में सवार होकर आए थे। सिर्फ यही नहीं उनकी गाड़ी पर गृह मंत्रालय का स्टीकर भी लगा हुआ था। जिस कार से आतंकी आए थे, उसमें 30 किलो आरडीएक्स (विस्फोटक) था। आतंकियों ने कई जगहों पर बम बिछा दिया था, लेकिन बम निरोदी दस्ता ने बम को निष्क्रिय आतंकियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया।
मास्टर माइंड अफजल गुरू को हुई फांसी
संसद हमले के मास्टर माइंड अफजल गुरू को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया। संसद हमले में साजिश रचने के आरोप में अफजल गुरू को सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2005 को फांसी की सजा सुनाई। कोर्ट ने आदेश दिया था कि 20 अक्टूबर 2006 को आतंकी को फांसी पर लटकाया जाए। लेकिन 3 अक्टूबर 2006 को अफजल की पत्नी तबसुम ने राष्ट्रपति के पास दया याचिका दायर की लेकिन राष्ट्रपति ने दया याचिका खारिज कर दी।
आखिरकार 9 फरवरी 2013 को इस खूंखार आतंकी को दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी के फंदे पर लटका दिया गया।
