गोताखोरों ने करीब एक दशक बाद टाइटैनिक जहाज को ढूंढकर इसकी कुछ तस्वीरें जारी की
जिस टाइटैनिक (Titanic) जहाज के बारे में ये कहा गया था कि वो कभी डूबेगा नहीं, वो न सिर्फ डूब गया बल्कि उसका मलबा भी धीरे-धीरे मिट्टी बन रहा है | वैज्ञानिकों ने तो यहां तक दावा कर दिया है कि खारे पानी की वजह से 30 साल में टाइटैनिक का मलबा पूरी तरह खत्म हो जाएगा | टाइटैनिक की तलाश में गए गोताखोरों ने करीब एक दशक बाद एक बार फिर इसे ढूंढकर इसकी कुछ तस्वीरें जारी की हैं | टाइटैनिक की ये तस्वीरें देंखकर न सिर्फ जेम्स कैमरून की फिल्म का वो बड़ा जहाज आंखों के सामने तैरने लगता है बल्कि इसकी हालत देखकर दुख भी होता है | नोवा स्कोटिया के हैलिफ़ैक्स में डलहौज़ी विश्वविद्यालय के शोधकर्ता हेनरीटेट मान ने वर्षों तक टाइटैनिक के मलबे का अध्ययन किया |
2010 में उन्होंने बैक्टीरिया की एक नई प्रजाति की खोज की - हेलोमोनस टिटानिका | यह बैक्टीरिया जहाज के मलबे से लिए गए जंग के नमूनों में पाया गया था | हेलोमोनस टाइटैनिका मलबे पर पाए जाने वाले जीवाणुओं में से है जो जहाज के लोहे को तोड़कर खा जाते हैं | इससे जहाज का लोहा खत्म हो रहा है और उसके आसपास घास उग रही है | टाइटैनिक साउथम्पटन (इंग्लैंड) से अपनी पहली यात्रा पर, 10 अप्रैल 1912 को रवाना हुआ था | टाइटैनिक का एक्सीडेंट 15 अप्रैल 1912 को हुआ था | उस वक्त दावा किया गया था कि टाइटैनिक कभी डूबेगा नहीं | लेकिन यह बर्फ से टकराकर दो हिस्सों में टूट गया था | इस घटना में करीब 1500 लोग मारे गए थे | वैसे जहाज का मलबा 34 साल पहले ही खोज लिया गया था | तब से लेकर अब तक टाइटैनिक पर फिल्में बन चुकी हैं | 1997 में बनी जेम्स कैमरून की टाइटैनिक फिल्म को ऑस्कर मिला था |
टाइटैनिक की तलाशी का अभियान इस बार कैलाडन ओशनिक के CEO और गहरे समुद्र के खोजकर्ता विक्टर वेसकोवो के नेतृत्व में चलाया गया | एक अभियान दल ने आठ दिनों के दौरान पांच बार मलबे में गोते लगाए | यही नहीं अमेरिका के गहरे समुद्र में खोजकर्ता विक्टर वेसकोवो (Victor Vescovo) ने हाल ही में अब तक की सबसे गहरी सबमरिन डाइव का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया | विश्व में सबसे गहरी प्राकृतिक खाई प्रशांत महासागर में करीब 35,853 फीट की गहराई में पहुंचकर 4 घंटे बिताए | गोताखोरों ने पहली बार एक दशक में टाइटैनिक के मलबे का दौरा किया |


