कश्मीर में बदलाव की हवा, अलगावादियों के फतवों से मिली आज़ादी
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पिछले एक पखवाड़े में पूरी वादी में माहौल तेजी से बदला है। पाबंदियों में जैसे-जैसे ढिलाई दी जा रही है, वादी में सामान्य जनजीवन भी पटरी पर लौट रहा है। ऐसे में अपनी दुकान पर ताला लगते देख हताश अलगाववादी व उनके समर्थक फिर जहर फैलाने की साजिश रच रहे हैं। कश्मीर में बदलाव की बयार के बीच अब अलगाववादियों की धमकियों और फतवों के खिलाफ भी लोग खुलकर सामने आ रहे हैं। सौरा में इश्तियाक अहमद नामक एक बुजुर्ग ने कहा कि इन पोस्टरों और इन्हें जारी करने वालों ने ही तो हमें तबाह किया है। यहां किसी ने आपके साथ कोई इनका जिक्र किया है, नहीं। यह सिर्फ मीडिया वाले ही इन्हें उछालते हैं और इन पोस्टरों पर अमल के लिए लोगों में भय पैदा कर देते हैं। इनका जिक्र न करो तो ही बेहतर है। अगर लोग इनके साथ होते तो आपको पूरे शहर में इस समय जुलूस नजर आते। कोई बड़ा प्रदर्शन देखा क्या आपने।' कल तक उनके इशारे पर सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ती थी अब उनके फरमानों पर आम कश्मीरी कान ही नहीं दे रहे हैं। अब न कोई उनके हड़ताली कैलेंडर पर ध्यान दे रहा है और न जिक्र करना पसंद करता है। वहीं, कुछ लोग स्वयं सामने आकर सुरक्षा बलों से अराजक तत्वों की शिकायत भी कर रहे हैं।
श्रीनगर के सौरा इलाके में बुधवार को हुर्रियत समेत कई अलगाववादी संगठनों के साझा संगठन ने कुछ पोस्टर चिपकाकर कर माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया। इससे पूर्व आठ अगस्त को राजबाग इलाके में जेआरएल व एक अन्य संगठन द्वारा हड़ताली कैलेंडर के पोस्टर चिपकाकर फरमान प्रदर्शनों के लिए उकसाया गया। ईद से दो दिन पहले भी डाउन-टाउन और बटमालू में कुछ आपत्तिजनक पोस्टर मिले। पर लोगों ने उनकी तमाम साजिशों की हवा निकाल दी और कोई भी प्रदर्शन करने नहीं पहुंचा। अलबत्ता, कुछ स्थानीय लोग ऐसी साजिशों के बारे में उसी समय पुलिस व सुरक्षा बलों को सूचित कर रहे हैं।





