गुलाबी गेंद से विकेटकीपिंग करना विकेटकीपरों के लिए चुनौतीपूर्ण- ऋद्धिमान साहा
इस मैच में फैंस में गुलाबी गेंद के कारण गेंदबाजी में होने वाले असर को लेकर भी बहुत बातें की जा रही हैं, लेकिन भारतीय विकेटकीपर ऋद्धिमान साहा (Wriddhiman Saha) ने इस बात पर ध्यान दिलाया है कि इससे विकेटकीपिंग पर भी असर होगा | साहा ने कहा है कि दिन-रात टेस्ट मैच में गुलाबी गेंद से विकेटकीपिंग करना विकेटकीपरों के लिए चुनौतीपूर्ण है | साहा ने कहा - (गुलाबी) गेंद को पकड़ना चुनौतीपूर्ण है | अगर यह स्लिप के लिए चुनौतीपूर्ण है तो मेरे लिए भी है क्योंकि मैं भी स्लिप के बगल में खड़ा रहता हूं | इसके अलावा तेज गेंदबाज जब गेंद फेंकते हैं तो यह गेंद लहराती है | यह एक फैक्टर हो सकता है, लेकिन मुझे चुनौती स्वीकार है | भारतीय खिलाड़ियों में साहा और मोहम्मद शमी को ही घरेलू क्रिकेट में दिन-रात मैच खेलने का अनुभव है |
दोनों खिलाड़ी 2016 में ईडन गार्डन्स में सीएबी के सुपर लीग फाइनल में दिन-रात क्रिकेट खेल चुके हैं | उन्होंने कहा - यह चुनौतीपूर्ण होगा, खासकर गेंद को पकड़ते समय | हमें इससे तालमेल बिठाना होगा | गेंद नई है और यह तेज गेंदबाजों के लिए मददगार साबित हो सकती है | यह बल्लेबाजों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है | इस मैच में गुलाबी गेंद से पेसर्स को तो मदद मिलने की बात की जा रही है, लेकिन स्पिनर्स के लिए गुलाबी गेंद के साथ डे-नाइट टेस्ट खेलना भी कम चुनौतीपूर्ण नहीं होगा | लाल गेंद डाई की जाती है जिसकी चमक खोने के बाद वह स्पिनर्स के लिए सहायक होती है | वहीं गुलाबी गेंद पर रंग की परत चढ़ाई जाती है जिससे उसकी चमक जल्दी न जा सके और बल्लेबाजों को सफेद रोशनी में गेंद देखने में दिक्कत न हो | ऐसे में स्पिनर्स को इस गेंद से मदद कम ही मिलने की संभावना है |






























